संकट में हजारों पाक विस्थापित, मुख्यमंत्री गहलोत के हस्तक्षेप के बाद जागे प्रशासन ने ली सुध

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हस्तक्षेप के पश्चात जिला प्रशासन ने आखिरकार लॉक डाउन के 18 वे दिन शहर में बसे पाक विस्थापितों की सुध ली है। जोधपुर शहर की करीब बीस बस्तियों में बड़ी संख्या में आबाद पाक विस्थापितों के समक्ष लॉक डाउन के पश्चात संकट खड़ा हो गया है। पाक विस्थापितों के मुख्य पैरोकार हिन्दूसिंह सोढ़ा ने गहलोत को पत्र भेज मदद का आग्रह किया था। इस पत्र पर संज्ञान लेते हुए गहलोत ने जिला प्रशासन को निर्देश जारी किए। प्रशासन ने अब सोढ़ा से संपर्क कर ऐसे पाक विस्थापितों की सूची मांगी है, जिनको प्राथमिकता के आधार पर मदद की दरकार है।  



जोधपुर शहर में करीब 35 हजार पाक विस्थापित आबाद है। इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को नागरिकता मिलने का इंतजार है। साथ ही कई लोग ऐसे भी है जिन्हें नागरिकता मिले महज एक साल या उससे कम समय हुआ है। ऐसे में इन लोगों के राशन कार्ड भी नहीं बने है। ये लोग खाद्य सुरक्षा योजना के दायरे में भी शामिल नहीं हो पाए है। सोढ़ा ने बताया कि जैसलमेर, बीकानेर व जोधपुर के करीब आठ हजार लोगों ने मदद के लिए उनके संगठन से संपर्क साधा है। जोधपुर में दैनिक भास्कर व उनके संगठन के कार्यकर्ताओं के सहयोग से बड़ी संख्या में जरुतमंद लोगों तक खाद्य सामग्री पहुंचाई गई है। इसको लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिख मदद मांगी थी। मुख्यमंत्री गहलोत ने तुरंत एक्शन लेते हुए सभी जिला कलेक्टरों से अपने-अपने क्षेत्रों में रहने वाले पाक विस्थापितों की मदद करने का निर्देश दिया। जोधपुर जिला प्रशासन ने सोढ़ा से संपर्क किया है। प्रशासन ने ऐसे लोगों की सूची मांगी है जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर मदद की आवश्यकता है। सोढ़ा ने कहा कि बड़ी संख्या में पाक विस्थापित दिहाड़ी मजदूरी कर अपना परिवार चलाते है। लॉक डाउन के कारण वे पूरी तरह से बेरोजगार हो चुके है। कुछ दिन तो उन्होंने स्वयं के स्तर पर व्यवस्था कर काम चलाया, लेकिन अब उनके लिए जुगाड़ करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में मदद की दरकार है और सरकारी स्तर पर प्रयास से ऐसे लोगों की मदद हो सकती है। उन्होंने कहा कि पके हुए भोजन की अपेक्षा खाद्य सामग्री प्रदान करना सबसे बेहतर विकल्प है। ताकि एक बार में ही ऐसे लोगों को कुछ दिन की सामग्री मिल जाए।